2/25/18

होली के पीछे छिपे वैज्ञानिक फायदे | Why is Holi festival celebrated in India 2019


Happy Holi festival March 2018

20 March 2019 के दिन भारत का मशहूर त्यौहार होली है और दूसरे दिन 21 March 2019 के दिन धुलेटी मनाई जाएगी. माना जाता है की इसी दिन दैत्य हिरण्यकश्यप ने भगवान की भक्ति कर रहे अपने ही संतान प्रह्लाद को मारने के लिए उनकी बहन होलिका को अपनी गोद में प्रह्लाद को लेकर बैठाया और अग्नि प्रगटाई गई. होलिका जिसे अग्नि से नहीं जलने का वरदान था, फिर भी होलिका अग्नि में जल कर भष्म हो गई और भक्त प्रह्लाद सलामत आग से बाहर आ गया और इसी खुसी में दूसरे दिन सभी लोग एक-दूसरे को कलर उड़ाके खुशिया मनाते है. यह है होली की कहानी.

भारत में हर हिन्दू त्यौहार के पीछे कोई ना कोई विज्ञान छिपा हुआ होता है. होली का धार्मिक महत्व है लेकिन उससे भी ज्यादा वैज्ञानिक महत्व है. आज में आपको विगत से होली का वैज्ञानिक सत्य बताने जा रहा हु जिसे आप महितगार हो पाओगे और होली के दिन वैज्ञानिक फायदे भी उठा पाओगे. आइये जानते है विगत से होली के पीछे छिपे वैज्ञानिक फायदे के बारेमें.



पहला फायदा है नकारात्मकता से मुक्ति:
होलिका दहन वैचारिक दृश्टिकोण से उस बात का प्रतिक है की हमारे मन में जो ख़राब और नकारात्मक विचार है उसे होली की अग्नि में समर्पित कर दे. हमेशा सच की एवम धर्म की ही जित होती है ऐसा दृश्टिकोण बनता है और मनोविकार से मुक्ति मिलती है. होली का दर्शन करने से हमारा मन शुद्ध एवम निर्मल होता है और नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है.

दूसरा फायदा है होली की अग्नि से रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है:
होली के समय पर शर्दी की मौसम पूरी होने के अंत पर होती है और गर्मी की मौसम की शुरुआत होती है. जब दो मौसम का अहसास एक साथ होता है तब रोगिस्ट हवामान हो जाता है और हम बीमार पड़ जाते है. ऐसे में होली का दर्शन करने से हमारे शरीर पर सकारात्मक प्रभाव होता है और हम बीमार नहीं पड़ते. छोटे बच्चो को भी इस समय पर होली की प्रदक्षिणा करवाई जाती है उसके पीछे भी यह वैज्ञानिक सत्य छिपा हुवा है. होली मे से मिल रही पॉजिटिव ऊर्जा हमारे शरीर में रोगप्रतिकारक शक्ति बढाती है और हम तंदुरस्त जीवन जी पाते है.



होलाष्टक के पीछे का तार्किक सत्य:
पुराने समय में होली से पहले गेहू जैसे धान्य की फसले काटने का समय होता था. इस दौरान अगर शुभ कार्य करते है तो फसले काटने का वक्त नहीं मिलता था और इसी वजह से दूसरे के शुभ कार्य में भी शामिल नहीं हो पाते थे. इसी लिए आठ दिन ऐसे सेट किये गए होंगे की जिसमे कोई शुभ कार्य न किया जाये और फ्री हो के होलिका त्योहार भी ठीक तरह से मना पाए.

कलर से खेलने का महत्व:
होलिका दहन के दूसरे दिन लोग एक दूसरे को कलर उड़ाते है. इससे किसी दूसरे स्नेहीजन से अगर कोई नाराजगी हो तो दूर हो जाती है. सब मिल-जुलकर रहने की प्रेणना भी मिलती है. पहले के समय में सिंथेटिक कलर की जगह केसुडे के फूल का प्रयोग किया जाता था जिसे सौंदर्य वर्धक माना जाता है. स्किन की समस्या से निजात दिलाने में यह फूल कारगत माना जाता है.



पहले के समय में हमारे ऋषि-मुनि बहुत ही बुद्धिमान थे. तरह-तरह के प्रयोग करके अच्छा परिणाम मिलने पर लोगो के सामने रखते थे. आज पूरी दुनिया उस विचर को या उन ऋषि-मुनि की शोध को अपनाने लगे है. योग जिसे लोग योगा कहते है वो भी हमारे ऋषि-मुनि की ही एक शोध है. ऐसी तो कई सारी चीजे है जिसे पुरे विश्व के लोग अपनाने लगे है.



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