2/28/17

परीक्षा के वक्त बच्चो को दही खिलाकर स्कूल क्यों भेजे? Benefits of eating curd during examination

दही एक अदभुत टॉनिक है. हमारे आयुर्वेद में भी दही के बारे में बताया गया है. शास्त्र में जो पंचामृत का उल्लेख किया जाता है उसमे एक अमृत दही भी है यानि दही को अमृत का दरज्जा दिया गया है. यह अमृत तुल्य दही खाने से कई सारे फायदे होते है और इसीलिए सालो से हम भोजन में इसका सेवन करते आये है. दही में एक तरह के बैक्टीरिया होता है जो हमारी सेहत के लिए बहुत ही उपयोगी होता है. भगवान श्री कृष्ण को भी दही बहुत पसंद था. हिन्दु धर्म में एक परंपरा रही है की कोई भी शुभ कार्य करने से पहले दही खिलाया जाता है. उदहारण के तौर पर अगर कोई स्टूडेंट एग्जाम देने के लिए जाता है तब उसे दही खिलाकर भेजा जाता है. आपने ऐसा कही देखा होगा या सुना होगा. यह परंपरा के पीछे भी एक विज्ञान छिपा हुवा है. यह विज्ञान जानकर आप भी जब घरसे बाहर निकलोगे तब जरूर दही खा कर निकलेंगे. अगर आप एक पेरेंट्स है तो आज से आपके बच्चे को भी दही खिलाकर स्कूल भेजेंगे. आइये जानते है परीक्षा के वक्त बच्चो को दही खिलाकर स्कूल क्यों भेजना चाहिए.

दही में कैल्शियम, प्रोटीन, ज़िंक और विटामिन बी-११ होता है, जो रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाने के लिए बहुत उपयोगी होता है. परीक्षा के समय बच्चा तंदुरस्त रहे वो जरूरी होता है. क्लास में कई सारे बच्चे होते है, अगर उन बच्चो में से कोई बच्चा बीमार है तो उनका इंफेक्शन आपके बच्चे को लग सकता है और अगर ऐसा  हुवा तो आपका बच्चा भी बीमार हो सकता है और इसी वजह से परीक्षा में डिस्टर्ब होगा. दही खा कर स्कूल जाने से रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ जाती है और इसी वजह से आपके बच्चे को इंफेक्शन लगने का खतरा कम हो जाता है और ठीक तरह से परीक्षा दे पायेगा.

दूसरा कारन है दही खाने से पाचन तंत्र मजबूत होता है. बच्चो में अक्सर पेट दर्द देखा जाता है. पाचन तंत्र मंद पड़ने से खाना हजम नहीं होता. ठीक तरह से खाना हजम नहीं होने की वजह से पेट से जुडी समस्याए खड़ी हो सकती है और परीक्षा के दौरान ऐसा होने से परीक्षा पर असर होती है. पाचनतंत्र ठीक रखने के लिए दही खाना जरूरी है. नियमित रूप से भी बच्चो को दही खिलाना चाहिए.

दही हाइपर टैंशन को दूर करने में सहायता करता है. हाइपर टैंशन यानि हाई बी.पी. की बीमारी में दही बहुत ही फायदेमंद होता है. हाई ब्लड प्रेशर की समस्या का एक कारन होता है तनाव और परीक्षा के वक्त बच्चे अक्सर तनाव की स्थिति में होते है. परीक्षा का तनाव हाइपर टैंशन की समस्या कड़ी कर सकता है. इसी वजह से अगर बच्चे को दही खिलाकर स्कूल भेजा जाये तो ब्लड प्रेशर नार्मल रहता है और ठीक तरह से एग्जाम दे पाता है.

दही सरदर्द एवं माइग्रेन में मददरूप होता है. बच्चो में एक ओर सामान्य समस्या होती है वो है सरदर्द की. बच्चे बार-बार सरदर्द की फरियाद करते रहते है. खास तौर पर माइग्रेन एक आम समस्या है. परीक्षा के दौरान तनाव बढ़ता है और इसी वजह से माइग्रेन की समस्या कड़ी होती है जो परीक्षा में डिस्टर्ब खड़ा करता है. दही खाने से माइग्रेन की समस्या से मुक्ति मिलती है और बच्चे ठीक तरह से परीक्षा दे पते है.

दही में दिमाग को शांत रखने का गुण होता है. दही दिमाग के न्यूरॉन्स को प्रभावित करता है. न्यूरॉन्स प्रभावित होने से दिमाग शांत रहता है और दिमाग शांत रहने से एकाग्रता बढ़ जाती है. दही खाने से बच्चे की मेमोरी पावर बढ़ जाता है और परीक्षा में याद रखा हुवा अच्छी तरह से रिकॉल करने की क्षमता भी बढ़ जाती है. एकाग्रत बढ़ाने के लिए, मेमोरी पावर बढ़ाने के लिए एवं परीक्षा में रिकॉल ठीक तरह से करने के लिए दही का सेवन करना जरूरी होता है.

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2/21/17

कैसे पता चलता है जब हृदय रोग होता है? Main sign and symptoms of heart attack

कई बार हम हमारे शरीर में हो रहे बदलाव को नजरअंदाज कर देते है. वैसे तो लगता है सामान्य बदलाव लेकिन नजरअंदाज करने से हम मुसकेलि में पद सकते है. इतना ही नहीं हमारी जान भी ले सकता है. अंग्रेजी में एक कहावत है "Prevention is better than cure" यानि सावधानी उपचार से अधिक अच्छी है. कुछ सावधानी रखने से हम यह बीमारी से दूर रह सकते है. हृदय रोग होने के बाद ट्रीटमेंट करवाने से समय और पैसे दोनों बरबाद होते है, इतना ही नहीं योग्य समय पर उपचार नहीं होने से जान भी जा सकती है, इसीलिए यह जानलेवा रोग होने से पहले ही उसके बारेमे जानकारी पा कर सावध हो जाने में ही समझदारी है. यहाँ में ऐसे ही हृदय रोग के कुछ लक्षण बताने जा रहा हु जिसे पहचान कर आप यह समस्या से समय पर निजात पा सकते हो. आइये जानते है हृदय रोग के कुछ लक्षण जिसे हम नजरअंदाज करते है.

अगर आपको ज्यादा गर्मी हो रही है और गर्मी की वजह से बार-बार पसीना निकल रहा है तो सावध हो जाइए; क्योकि यह लक्षण हार्ट अटैक का है. अगर ऐसा महसूस हो रहा हो तो तुरंत अपने करीबी को जानकारी दे और तुरंत ही डॉक्टर के पास पहुंच जाइये.

अगर आप छाती में या पीठ के ऊपरी हिस्से में दबाव महसूस कर रहे हो तो सावध हो जाइये; क्योकि यह हार्ट अटैक का संकेत है. ऐसा होने पर इसे नॉर्मली ना ले कर तुरंत हॉस्पिटल पहुँच जाये और डॉक्टर की सलाह ले.

अगर छाती की लेफ्ट साइड में दर्द महसूस हो रहा है. ऐसा लगता है की छाती पर पथ्थर रखा गया है तो यह हार्ट अटैक का लक्षण हो सकता है.

अगर आपको पेट में दर्द हो रहा है, ठीक तरह से पाचन नहीं हो रहा है, बार-बार वोमिटिंग हो रही है और शरीर में कमजोरी महसूस हो रही है तो समाज लेना हार्ट की प्रॉब्लम हो सकती है.

अगर आप अचानक बीमार हो जाते है और आपका चेहरा पीला हो जाता है तो सावधान हो जाइये. अचानक बीमार हो जाना और चेहरा पीला हो जाना भी हार्ट प्रॉब्लम का लक्षण हो सकता है.

कई बार बिना कारन गर्दन और जबड़ो में दर्द होता रहता है. यह समस्या हमें सामान्य लगती है और हम उसे नजरअंदाज कर देते है. यह लक्षण हार्ट अटैक के हो सकते है. ऐसा होने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.

अगर आप कोई भी काम करने से थक जाते है या सामान्य काम करने से भी थकन महसूस करते हो या हमेशा कमजोरी महसूस कर रहे है तो हो सकता है की आपको हार्ट प्रॉब्लम हो. सामान्य काम करने से थकान महसूस होना और दिल की धड़कन तेज हो जाना और बेचैनी फील होना भी दिल के दौरे का लक्षण हो सकता है.

कई बार बिना वजह बैचेनी फील होती है और सिर घूमता हो ऐसा लगने से उसे इग्नोर न करे; क्योकि बिना वजह बैचेनी महसूस करना या सिर घूमना कोई सामान्य समस्या नहीं हो सकती. ऐसा होना हृदय रोग का लक्षण हो सकता है.

कई बार अचानक सिर घूमने लगता है और साँस लेने में दिक्कत होती है. अचानक चक्कर आना और साँस लेने में परेशानी होना होना भी हार्ट अटैक की एक निशानी है. इस संकेत को नजरअंदाज करने की बजाये डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए.

आइये जानते है अचानक हार्ट अटैक आने पर अपनी जान कैसे बचाये. अगर अचानक हार्ट अटैक आ जाये और आपके आस-पास कोई न हो तो तुरंत जोर जोर से खांसने लगे. खांसने से हृदय में ब्लड का पम्पिंग अच्छी तरह से होने लगता है और हम आसानी से हॉस्पिटल तक पहुँच कर अपनी जान बचा सकते है. ऊपर दिए गए लक्षणों में से कोई एक लक्षण भी दिखाई दे तो तुरंत ही डॉक्टर के पास चेक उप करवाना चाहिए और परहेज रखनी चाहिए ताकि हार्ट रिलेटेड समस्या से हम बच शके.

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